अच्छी खबर क्या है ? सबसे बढ़िया खबर है कि तुम जीवित हो । इससे बढ़िया खबर तो कोई हो ही नहीं सकती , तुम्हारे अंदर उस बनाने वाले की कृपा है । और उस कृया का सबूत क्या है ? कि तुम्हारे अंदर यह स्वांस आ रहा है और जा रहा है ।
बहुत पहले मैंने कहा था कि
" तुम मुझे प्रेम दो , में तुम्हें शांति दूंगा ! "
न तो में उस बात को भूला हूं- और वो
बात उतनी ही तब भी सत्य थी ,
जितनी आज सत्य है । और जैसे भी में
कोशिश कर सकता हूं ,
वही कोशिश कर रहा हूं , और तब तक
कोशिश करता रहूंगा जब तक मेरे
शरीर में ये स्वांस है !
गुरु ज्ञान महिमा
गुरु ज्ञान महिमा ऐसारे गुरु ज्ञान लखाया , आवै जाइ सो दृष्टि न आया । मन थिर करूंगा , नाद भरूंगा , राम रमूंगा , रस माना । अधर रहूंगा , करम दहूंगा , एक भजूंगा भगवन्ना ॥ अलखलखूगा , अकथ कडूंगा , माही मयूँगा गोविन्दा । अगह गहूंगा , अकह कहूंगा , अलह लहूंगा , खोजन्ता ॥ अचर चरूंगा , अजर जरूंगा , अतिर तिरूंगा , आनंदा । यह तन तारूं , विषय निवारूं , आप उबारूं , साधंता ॥ आऊ न जाऊं , उनमनि लाऊ , सहज समाऊं , गुणवत्ता । नूर पिछाणूं , तेजहि जाणूं , ' दादू ' ज्योतिहि देखन्ना ॥
हर एक स्वांस में से जो आनंद है !
उसे निचोड़ो । उसमें जितना है ,
वह पूरा का पूरावाओ।
छोड़ो मत ।एक भी बूंद मत छोड़ो ।